ईरान के मौजूदा हालात पर आतंकविरोधी संगठन हिज्बुल्लाह के प्रमुख का बयान

 हसन नसरुल्लाह लेबनान के राजनीतिक और सैन्य संगठन( हिज्बुल्लाह) के प्रमुख  हैं इस संगठन का मध्य पूर्व में काफी प्रभाव है 2006 में ये संगठन अजय माने जाने वाले इजराइल को नाकों तले चने चबवा चुका है सैयद हसन नसरुल्लाह ने ईरान के मौजूदा हालात और उसमें ईरानी दुश्मनों की साजिश को लेकर अहम बयान दिया है   जिसमें उन्होंने कई अहम प्वाइंट जिक्र किए हैं ,

पश्चिमी मीडिया द्वारा ईरान में महसा अमीनी की मौत को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा है मामला पूरी तरह साफ होने से पहले ही इसके लिए ईरानी सरकार को घेरा जा रहा है जिस पर सैयद हसन ने कहा है कि "मैं तमाम ईरानी इस्लामी गणतंत्र के दोस्तों को बताना चाहता हूं कि आप परेशान न हों, ईरान इससे कहीं ताक़तवर है कि उसको नुक़सान पहुंचाया जा सके।
एक ईरानी औरत की मौत ऐसे हालात में जहां अभी तक सारी बातें साफ़ नहीं हैं उस को विवादित बना दिया गया। यूरोपीय, अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया सबने एक स्टैंड ले लिया और लोगों को भड़काने की कोशिश की"।

अफगानिस्तान में शिया समुदाय के छात्रों के कोचिंग सेंटर पर हमला कर दिया गया जिसमें छात्रों की मौत हो गई लेकिन दोगली मीडिया ने उसको महसा अमीनी के मामले जैसी कवरेज नहीं दी है  जिसकी और इशारा करते हुए हसन नसरुल्लाह कहते हैं कि "जबकि दूसरी तरफ़ एक जगह 50 से ज़्यादा लोग मार दिए गए लेकिन किसी ने कोई स्टैंड नही लिया"|

ईरान में कुछ भी हो जाने पर दुश्मन उसके गलत प्रचार प्रचार में लग जाते हैं इनको बेनकाब करते हुए नसरूल्लाह ने कहा है कि "जैसे ही ईरान में कुछ भी घटित होता है भले ही उसकी तमाम बातें साफ़ ना हों फ़ौरन एक स्टैंड ले लेते है। वो ईरान में घटित हर घटना से फ़ायदा उठाते हुए हर किसी को ईरान के ख़िलाफ़ भड़काने की कोशिश करते हैं। दर्जनों और सैकड़ो टीवी, सैटेलाइट चैनल और सोशल मीडिया अकाउंट्स वर्चुअल स्पेस में लोगो को भड़काने में लग गए थे। वजह ये है कि उनका निशाना इस्लामी ईरानी गणतंत्र है जो कि मज़ाहेमत (Resistance) का दिल है"

इस घटना को बहाना बनाकर ईरान पर  प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं सैय्यद हसन ने प्रतिबंधों के इस मकसद को बयान किया है कि  "ईरान के ख़िलाफ़ कड़े प्रतिबंध लगाने की वजह ही ये है कि अवाम को परेशान करके इस्लामी तंत्र के ख़िलाफ़ खड़ा किया जा सके"

जैसा कि आपको पता है दुश्मन ईरान के खिलाफ तरह तरह कि साजिश करता है इसी के मुतल्लिक सैय्यद हसन ने कहा कि   "दुश्मन कभी कभी कोई घटना ख़ुद करवाते हैं ताकि लोगों को भड़काया जा सके। जैसे कि अभी हाल में सुप्रीम लीडर की मौत से वाबस्ता अफ़वाहें उड़ाई गई और उसके बाद आपने देखा कि वो अरबईन और दूसरे मौक़े पर सामने आए और उन अफ़वाहों को लगाम लगाई। ये अफ़वाहें ईरानी लोगों के हौसलों को तोड़ने के लिए फैलाई जाती हैं"

दुश्मन के प्रोपेगेंडा को ईरानी अवाम ने कैसे नाकाम किया इसके बारे में भी सैय्यद हसन नसरुल्लाह ने जिक्र किया
"इन लोगों ने इन घटनाओं का गलत इस्तेमाल किया। शुरू के कुछ दिनों में, मीडिया ने फ़ोटो छापे और कहा देखो ईरान के लोगों को लेकिन जैसे ही कुछ दिन बाद ईरान के लाखों लोग सड़कों पर उतरे इस्लामी ईरानी गणतंत्र के समर्थन में तो तमाम मीडिया ख़ामोश हो गई आप मोहर्रम, सफ़र, हज क़ासिम सोलेमानी के जनाज़े और दीगर मौकों पर चाहने वाली अवाम देखें हैं। उन नालायकों को इन बातो को देखना और ईरान की असलियत समझना चाहिए"।

ईरानी संविधान की बात करते हुए उन्होंने यकीन दिलाया कि चिंता की कोई बात नहीं है " मैं ईरान के दोस्तों से कहना चाहता हूं कि आप बिलकुल भी परेशान न हों। ईरान जिसने अपने संविधान में लिख रखा है कि इसके असली हाकिम इमाम मेंहदी (अलैहिस्सलाम) हैं, वो बहुत ताक़तवर है कि उसको नुक़सान पहुंचाया जा सके। इसलिए परेशान मत होइए"।

ईरान की मजबूती और इलाके में ईरान की तरफ से दी गई कुर्बानियों का जिक्र भी हसन नसरुल्लाह ने किया और कासिम सुलेमानी को याद किया  वो कहते हैं "इस्लामी गणतंत्र भरोसा करता है अल्लाह पर और एक अद्वितीय, हिम्मती रहबर वा शहादत के जज़्बे से भरे हुए मुजाहिदीन ए ईरान पर। लोगों को लगातार इस्लामी ईरानी गणतंत्र के ख़िलाफ़ भड़काना एक शैतानी काम है। इस्लामी गणतंत्र इलाक़े के किसी मुल्क से कोई उम्मीद वाबस्ता नही किए और ये बात मैं अपने चालीस साल के तजुर्बे के बिना पर कह रहे हैं। तुमने देखा है और देखते हो को कौन मुल्क हैं जो इराक़ के तेल और दूसरी संपदाओं पर गिद्ध नज़र रखे हुए हैं! क्या आपने ट्रंप को नही देखा?? ईरान दूसरी तरफ़ ख़ुद ख़र्च कर रहा है, अपने शहीदों के ख़ून से इलाक़े के लोगों की जाने बचा रहा है। शहीदों में सरे फ़हरिस्त हज सोलेमानी हैं।
आपने देखा था कि सऊदी ने कई हज़ार ख़ुदकुश( आत्मघाती)  आतंकियों को इराक़ भेजा था जिन्होंने मस्जिदों और चर्च तक को उड़ा दिया जबकि ईरान ने क्या क्या क़ुर्बानियां नही दी इराक़ को ISIS से बचाने में"|

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