सांखनी गाँव में "गुलामाने हैदरी 72" द्वारा आयोजित सभा बेहद क्रांतिकारी -
इतिहास साक्षी है जब जब अत्याचारी प्रोपेगंडा शक्तियों को असफल बनाने के लिये भारतीय गाँव आगे आये हैं तब तब अत्याचारियों को शिकस्त का सामना करना पड़ा है ऐसा एक दो बार नहीं बल्कि अनेकों बार देखने को मिला है 1857 के विद्रोह का इतना शक्तिशाली होना , कि जिससे ब्रिटिश शासन भयभीत हो गया , भारतीय ग्रामीण जनता की भागीदारी से ही संभव हो पाया था इसी तरह महात्मा गांधी द्वारा भी असहयोग और नागरिक अवज्ञा जैसे आंदोलन में भारतीय ग्रामीण समाज के योगदान पर ध्यान दिया गया , भारतीय ग्रामों से दुराचारी शक्तियों को मुंहतोड़ जवाब न केवल आज़ादी से पूर्व दिया गया है बल्कि आज़ादी के बाद भी ये प्रवृत्ति बरक़रार है , स्वतंत्र भारत में अनाज की कमी होने पर अमरीका ने भारत को दबाव में लेने का प्रयास किया था , ऐसे में देश के किसानों ने खून पसीना एक करते हुए भारत को अन्न आयातक देश से अन्न निर्यातक देश बना दिया , ये सारी घटनाएँ भारतीय ग्रामीण जनता की महानता का वर्णन करती हैं आज भी भारतीय ग्राम दुराचारी शक्तियों के खिलाफ हैं और महान शख्सियतों के साथ दृढ़ता से खड़े हैं , इसी कड़ी में भारत के उत्तर प्रदेश राज्...