संदेश

एक वीर कमांडर(मोला अब्बास ) - जिसका आचरण आज भी अनुकरनीय है-

संसार में अनेकों बलशाली कमांडर गुज़रे हैं जिनका सम्बन्ध अलग अलग कबीलों और राष्ट्रों से रहा है जिन्होंने बड़े  बड़े  युद्धों में विजय प्राप्त की हैं  , लेकिन फिर भी ह्र्दय पर विजय कुछ ही कमांडर पा पाये हैं जिसका कारण उनका बलशाली होने के साथ  आचरण का पवित्र होना था  आज हम जिस कमांडर को उसके जन्मदिवस के अवसर पर याद कर रहे हैं वो एक मज़लूम लेकिन वीर कमांडर हैं जो आज भी सत्य के मैदान में युध्दरत सिपाहियों के लिये प्रेरणा हैं वो व्यक्तित्व अब्बास इब्ने इमाम अली है ।  नि:सन्देह मोला अब्बास का व्यक्तित्व एक सैन्य कमांडर के लिये आदर्श है हर वो पहलु जो एक सैनिक को निष्ठावान बनाता है वो मोला अब्बास के व्यक्तित्व में मिलता है । मोला अब्बास का धेर्य  जो इमाम हुसैन के आदेश के पालन के सम्बन्ध में देखने को मिलता है वो अनुपम और अनुकरणीय है। यज़ीदी फौज द्वारा उकसाने के बावजूद अपने आक़ा की दूरदृष्टि के आदेशों पर चलना मोला अब्बास का व्यक्तित्व है असीम शक्ति के होते हुए जिस तरह मोला अब्बास ने धैर्य रखा वो दर्शनीय है । एक सैनिक की पहचान शक्ति के साथ साथ निर्बल वर्गों के विश्वास...

सांखनी गाँव में "गुलामाने हैदरी 72" द्वारा आयोजित सभा बेहद क्रांतिकारी -

 इतिहास साक्षी है जब जब अत्याचारी प्रोपेगंडा शक्तियों को असफल बनाने के लिये भारतीय गाँव  आगे आये हैं तब तब अत्याचारियों को शिकस्त का सामना करना पड़ा है ऐसा एक दो बार नहीं बल्कि अनेकों बार देखने को मिला है 1857 के विद्रोह का इतना शक्तिशाली होना , कि जिससे ब्रिटिश शासन भयभीत हो गया , भारतीय ग्रामीण जनता की भागीदारी से ही संभव हो पाया था  इसी तरह महात्मा गांधी द्वारा भी असहयोग और नागरिक अवज्ञा जैसे आंदोलन में भारतीय ग्रामीण समाज के योगदान पर ध्यान दिया गया , भारतीय ग्रामों से दुराचारी शक्तियों को मुंहतोड़ जवाब न केवल आज़ादी से पूर्व दिया गया है बल्कि आज़ादी के बाद भी ये प्रवृत्ति बरक़रार है ,  स्वतंत्र भारत में अनाज की कमी होने पर अमरीका ने भारत को दबाव में लेने का प्रयास किया था , ऐसे में देश के किसानों ने खून पसीना एक करते हुए भारत को अन्न आयातक देश से अन्न निर्यातक देश बना दिया , ये सारी घटनाएँ भारतीय ग्रामीण जनता की महानता का वर्णन करती हैं आज भी भारतीय ग्राम दुराचारी शक्तियों के खिलाफ हैं और महान शख्सियतों के साथ दृढ़ता से खड़े हैं , इसी कड़ी में भारत के उत्तर प्रदेश राज्...

दादी की गोद अनमोल होती है

जिनको पूर्वजों का साथ मिलता है उनको लम्बे काल का अनुभव कम समय में मिल जाता है पूर्वज, दादा दादी नाना नानी आदि रूप में हो सकते हैं भारतीय परिवारों में बालक का जीवन सामान्यत दादी की गोद में ही व्यतीत होता है जिनसे रात्रि में सोने से पहले कहानी, गीत आदि सुनने को मिलते हैं इससे बालक का दो स्तर पर विकास होता है सबसे पहला फायदा यह है कि इससे बालक की स्मरण शक्ति दृढ़ होती है दूसरा यह की भारत की नैतिकता से परिपूर्ण कहानियां बच्चे के नैतिक विकास में सहायक हैं इसके अतिरिक्त वृद्धों से जुड़ना बच्चों   में वृद्धों के प्रति प्रेम उत्पन्न करता है दादी पोते/पोति का यह बंधन अत्यंत प्रेमपूर्ण सम्बन्ध के रूप में जाना जाता रहा है लेकिन आज मोबाइल के युग ने इस बंधन में खलल डाली है जिस कारण बच्चे पूर्वजों से पहले की तरह मज़बूती से नहीं जुड़ पा रहे हैं जिस कारण बच्चों के पिता भी अपने माता पिता की उपेक्षा करते दिख रहे हैं जिसका अंदाज़ा वृद्धाश्रमों में बढ़ी संख्या से लगाया जा सकता है वृद्धावस्था में मानव की उत्पादकता क्षमता कम होने लगती है ऐसे में बच्चों से जुड़ाव वृद्धों के लिये शारीरिक और मानसिक स्वास्थय ...

ईरान को निशाना बनाने वाले लोग शिया हजारा समुदाय के कत्लेआम पर चुप क्यों?

 कुछ दिन पहले अफगानिस्तान में हजारा समुदाय के एक तालीमी इदारे पर आतंकियों ने हमला कर दिया था जिसमे 50 से ज़्यादा बच्चे शहीद हो गए थे जिसको लेकर अब पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन किया गया है जिसमें हजारा समुदाय के विभिन्न वर्गों से संबंध रखने वाले लोगों ने हिस्सा लिया और आतंकवाद का विरोध किया , ये ज्ञात है कि अफगानिस्तान व पाकिस्तान में लगातार शिया समुदाय पर हमले हो रहे हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय संगठन इसको रोकने के लिए असरदार कदम उठाते नहीं दिख रहे हैं संयुक्त राष्ट्र को अफगानिस्तान की तालीबानी सरकार पर दबाव डालना चाहिए ताकि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो , और हजारा समुदाय पर हो रहे हमलों को नरसहार घोषित करके समुदाय की सुरक्षा के विशेष इंतजाम करने चाहिए , विश्व विख्यात लोगों और मीडिया को इस मामले में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए लेकिन इनकी चुप्पी शर्मनाक है दरअसल ऐसे लोग जो ईरान में पुलिस कस्टडी में एक महिला की मृत्यु पर तो दुखी हैं जो पहले से बीमारी से ग्रसित थी , लेकिन अफगानिस्तान में हुए शिया हजारा समुदाय की छात्रों के कत्लेआम पर दुखी नहीं हैं वो एक दोगलेपन के मालिक हैं , ऐस...

ईरान के मौजूदा हालात पर आतंकविरोधी संगठन हिज्बुल्लाह के प्रमुख का बयान

 हसन नसरुल्लाह लेबनान के राजनीतिक और सैन्य संगठन( हिज्बुल्लाह) के प्रमुख  हैं इस संगठन का मध्य पूर्व में काफी प्रभाव है 2006 में ये संगठन अजय माने जाने वाले इजराइल को नाकों तले चने चबवा चुका है सैयद हसन नसरुल्लाह ने ईरान के मौजूदा हालात और उसमें ईरानी दुश्मनों की साजिश को लेकर अहम बयान दिया है   जिसमें उन्होंने कई अहम प्वाइंट जिक्र किए हैं , पश्चिमी मीडिया द्वारा ईरान में महसा अमीनी की मौत को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा है मामला पूरी तरह साफ होने से पहले ही इसके लिए ईरानी सरकार को घेरा जा रहा है जिस पर सैयद हसन ने कहा है कि "मैं तमाम ईरानी इस्लामी गणतंत्र के दोस्तों को बताना चाहता हूं कि आप परेशान न हों, ईरान इससे कहीं ताक़तवर है कि उसको नुक़सान पहुंचाया जा सके। एक ईरानी औरत की मौत ऐसे हालात में जहां अभी तक सारी बातें साफ़ नहीं हैं उस को विवादित बना दिया गया। यूरोपीय, अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया सबने एक स्टैंड ले लिया और लोगों को भड़काने की कोशिश की"। अफगानिस्तान में शिया समुदाय के छात्रों के कोचिंग सेंटर पर हमला कर दिया गया जिसमें छात्रों की मौत हो गई लेकिन दोगली...

तालिबान की हुकूमत में एक बार फिर शिया समुदाय पर हमला , 50 के करीब शहीद

 तालिबान की हुकूमत में एक बार फिर शिया समुदाय को निशाना बनाकर आतंकी हमला किया गया है इस बार आतंकियों ने एक कोचिंग सेंटर को निशाने पर लिया है जिसकी चपेट में 100 से ज़्यादा लोग आए हैं तकरीबन 50 लोगों की शहादत हो गई बाकि घायल हैं शहीद होने वालों में बढ़ी तादाद में स्कूली बच्चियां हैं ध्यातव्य है जबसे तालिबान के हाथ हुकूमत लगी है तबसे शिया समुदाय पर ज़ुल्म बढ़ता  जा रहा है तालिबान ने शिया समुदाय के खिलाफ जाने का खुले तौर पर ऐलान तो नहीं किया है लेकिन तालिबान शिया समुदाय पर आतंकी हमलों के लिए दोषी isis की शाखा isis_k का मौन समर्थन  करता है तालिबान इस कातिल संगठन को खतरा नहीं बताता है जो साबित करता है कि तालिबान को अफगानिस्तान के शिया समुदाय की रक्षा में कोई दिलचस्पी नहीं है एक तरह से तालिबान ने इस संगठन को खुली छूट दे रखी है यूं तो तालिबान का इतिहास खुद भी पाक साफ नहीं है लेकिन इस बार तालिबान के हाथ सत्ता लगने के बाद विश्व समुदाय तालिबान से ऐसी समावेशी सरकार की मांग कर रखा है जिसमें महिलाओं और अल्पसंख्यकों की उचित भागीदारी हो, तालिबान ने इस संबंध में विश्व समुदाय को अंधेरे में...