तालिबान की हुकूमत में एक बार फिर शिया समुदाय पर हमला , 50 के करीब शहीद

 तालिबान की हुकूमत में एक बार फिर शिया समुदाय को निशाना बनाकर आतंकी हमला किया गया है इस बार आतंकियों ने एक कोचिंग सेंटर को निशाने पर लिया है जिसकी चपेट में 100 से ज़्यादा लोग आए हैं तकरीबन 50 लोगों की शहादत हो गई बाकि घायल हैं शहीद होने वालों में बढ़ी तादाद में स्कूली बच्चियां हैं ध्यातव्य है जबसे तालिबान के हाथ हुकूमत लगी है तबसे शिया समुदाय पर ज़ुल्म बढ़ता  जा रहा है तालिबान ने शिया समुदाय के खिलाफ जाने का खुले तौर पर ऐलान तो नहीं किया है लेकिन तालिबान शिया समुदाय पर आतंकी हमलों के लिए दोषी isis की शाखा isis_k का मौन समर्थन  करता है तालिबान इस कातिल संगठन को खतरा नहीं बताता है जो साबित करता है कि तालिबान को अफगानिस्तान के शिया समुदाय की रक्षा में कोई दिलचस्पी नहीं है एक तरह से तालिबान ने इस संगठन को खुली छूट दे रखी है यूं तो तालिबान का इतिहास खुद भी पाक साफ नहीं है लेकिन इस बार तालिबान के हाथ सत्ता लगने के बाद विश्व समुदाय तालिबान से ऐसी समावेशी सरकार की मांग कर रखा है जिसमें महिलाओं और अल्पसंख्यकों की उचित भागीदारी हो, तालिबान ने इस संबंध में विश्व समुदाय को अंधेरे में रखा है तालिबान अल्पसंख्यकों को उचित सुरक्षा देने जैसे इस्लामिक मूल्यों को लगातार अपने शासन में रौंद रहा है जिसकी शिक्षा रसूल अल्लाह ने हर मुसलमान को दी है तालिबान की दोगली नीति की निंदा दुनिया में गिने चुने इस्लामिक संगठन ही कर रहे हैं बाकि इस्लाम और मुसलमान की रक्षा के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा न किए जाने व महिलाओं को उनका हक न दिए जाने के लिए तालिबान को सजा दी जानी चाहिए , तालिबान को भी दोगली नीति छोड़कर शिया समुदाय की हिफाजत की जिम्मेदारी से हाथ उठाकर दूसरे देशों को isis जैसे घातक संगठन से मुकाबले के लिए अफगानिस्तान में आने की छूट दे देनी चाहिए ताकि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो , अभी तक शिया समुदाय का जितना खून बहा है उस पर हल्की फुल्की प्रतिक्रिया ही विश्व समुदाय ने दी है ऐसे में तालिबान  की दोगली नीतियों पर रोक कैसे लगेगी ? ये जानना भी रोचक है कि दुनियाभर में बात बात पर मुस्लिमों की रक्षा के लिए रैलियों का आयोजन करने वाले संगठन भी शिया मुस्लिम समुदाय के निर्दोष खून के बहने पर चुप हैं जिस वजह से अफगान के शिया खौफ में जिंदगी जीने को मजबूर हैं इंसानियत के नाते हम सब का कर्तव्य है इस हमले की भरपूर मजम्मत की जाए यह न केवल एक समुदाय पर हमला है बल्कि स्कूल पर भी हमला है |

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